इंदिरा एकादशी व्रत कथा: भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी यह कथा, जानें पितरों से जुड़ा धार्मिक महत्व

Entertainment Entertainment

Posted by admin on 2026-10-06 12:22:28 |

Share: Facebook | Twitter | Whatsapp | Linkedin Visits: 5


इंदिरा एकादशी व्रत कथा: भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी यह कथा, जानें पितरों से जुड़ा धार्मिक महत्व

इंदिरा एकादशी 2026: पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने के साथ पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और प्रार्थना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित करने से उन्हें सद्गति मिलने की कामना की जाती है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है।

भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी के बारे में पूछा। श्रीकृष्ण ने उन्हें इंदिरा एकादशी का महत्व बताते हुए राजा इंद्रसेन की कथा सुनाई।

कहा जाता है कि राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के भक्त और एक प्रतापी शासक थे। एक दिन उनके दरबार में देवर्षि नारद पहुंचे। नारद मुनि ने राजा को बताया कि उनके पिता को मृत्यु के बाद ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें मुक्ति नहीं मिल पा रही है।

नारद मुनि ने राजा को इंदिरा एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता को समर्पित करने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना के साथ पितरों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से राजा के पिता को सद्गति प्राप्त हुई। इसी कारण इंदिरा एकादशी को पितरों की शांति और मुक्ति की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।

पितृ पक्ष में क्यों खास है इंदिरा एकादशी?

इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष के दौरान आती है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पूर्वजों का स्मरण और उनके निमित्त तर्पण एवं श्राद्ध करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पितरों के लिए पुण्य समर्पित करने वाली एकादशी के रूप में विशेष महत्व दिया गया है।

इंदिरा एकादशी 2026 की तिथि

इस वर्ष एकादशी तिथि 6 अक्टूबर 2026 को रात 2:07 बजे शुरू हुई और 7 अक्टूबर 2026 की रात 12:34 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित समय में किया जाता है।

भक्त इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान, पूजा और नाम-स्मरण करते हैं। साथ ही अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पितरों के लिए तर्पण तथा अन्य धार्मिक कर्म करते हैं।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई धार्मिक मान्यताएं और कथा विभिन्न धार्मिक ग्रंथों एवं परंपराओं में वर्णित मान्यताओं पर आधारित हैं।



Leave a Comment: